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गुरुवार, 1 जुलाई 2021

हेयर कट

साला कान पर से टोपा हटाता तब सुनाई देता ना, 
उसे चार बार बोला था 
'बाल छोटे मत करियो' 
एक बार तो उसके बॉस ने भी कह दिया 
भईया बाल बड़े रखते हैं छोटे मत करियो, जैसे कह रहे हैं वैसे ही करियो, 
साला पता नहीं क्या नशा करके बैठा था, कैंची ली और गुद्दी पर से कट...एक सेकंड में साला चार शॉट मार गया कच-कच-कच-कच, मैंने फिर कहा 'भाई छोटे नहीं करने हैं'
तो कहता है, 'नहीं भैया बस कर्ली बाल हटा रहा हूं'
फिर साला चार शॉट मार गया
कच-कच-कच-कच, 
मैंने कहा 'रुक जा, रुक जा काका रुक जा, कान पर से टोपा हटा और रुक जा' 
लेकिन क्या फायदा? तब तक तो भाई साहब बाल छोटे कर चुके थे। 
क्या फायदा?
इतने सालों से मेंटेन किया हुआ लुक, उस लॉलीपॉप-सी शक्ल वाले ने कर दिया खराब, फिर बाद में जैसे-तैसे सेट करवा कर यह ऊपर के चांद के बाल बचाये हैं, जो आपको यह मेरे सिर पर खड़े घौंसले जैसे दिखाई दे रहे हैं, उसके बॉस शंकर ने ही सेट किए थे। 

कहता है, 'भैया इसमें बड़े डीसेंट लग रहे हो'

दिल मैं आया एक झापड़ खींच कर दूं, 
'अबे लॉलीपॉप, तेरे चूज़े जैसे चेले ने मेरे इतने सालों का मेंटेन किया हुआ लुक खराब कर दिया... पैसे तो पूरे लेगा तू लपड़ झन्ने...
बहरहाल हम अपने नए लुक के साथ कॉलेज पहुंचे, ऐसा रिस्पांस तो हमें कभी नहीं मिला था, जिसे देखो वह कन्या हमारे विषय में वार्तालाप कर रही थी...

और फिर आई हमारे दिल की धड़कन...
वह सामने आती है तो बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है, पेड़ों से पत्ते झड़ने लगते हैं...हवाएं चलने लगती हैं...और जैसा बॉलीवुड फिल्मों में होता है, गिटार और वायलिन बजने लगते हैं, वैसे ही मेरे दिल की धड़कन भी गिटार की स्ट्रिंग्स की तरह बजने लगती हैं
तिडिंग-तिडिंग-तिंग-तिंग-तिंग,
तिडिंग-तिडिंग-तिंग-तिंग-तिंग...

इतने सारे शोर के बीच उसने हल्के-से धीरे-से अपनी मधुर आवाज में कहा
'सुनो अच्छे लग रहे हो', 
'आय-हाय...अब तो तय कर लिया है, हेयर स्टाइल हमारा यही रहेगा... वैसे इतने बुरे भी नहीं काटे हैं, हमने अपने मोटरसाइकिल के शीशे में बालों को देखा...अरे ठीक नहीं बहुत अच्छे हैं।
चलिए अभी निकलते हैं, मैडम को ज़रा छोड़ कर आना है...
फिर मिलेंगे.

बुधवार, 9 सितंबर 2020

किट्टू

मैं रोज़ सुबह जल्दी उठने का आदी हूं। सुबह जल्दी उठता हूं, घर की छत पर जाता हूं और वहां टहलता हूं। कभी-कभी पड़ोस की छतों पर भी जाता हूं, बहुत सी लड़कियां तो सिर्फ मेरी वजह से ही छत पर सुबह जल्दी आती हैं, उनको मेरे साथ खेलना अच्छा लगता है और मुझे भी उनके साथ खेलना अच्छा लगता है। 
लेकिन सुबह मुझे सोनिया की बाहों से निकलने में बड़ी मुश्किल होती है, सारी रात मुझे बाजुओं में कस कर सोती है। ख़ैर कुछ दिन पहले मैं रोज की तरह उठा, छत पर गया और टहल रहा था कि मैंने उसे देखा...मेरी आंखें मानो मेरे चेहरे से निकलने को थीं... वाह!...क्या गज़ब की लगती थी वह।
छज्जे की मुलगेढी पर जब चलती थी तो लगता था कि रैंप वॉक कर रही है। मेरी आंखें और मुंह खुला का खुला रह गया । क्या कमाल की बिल्ली थी वह...अगर यह मेरी जिंदगी में आ जाए, तो मैं सारी कायनात इसके लिए छोड़ दूं। चौंक क्यों गए? 
मैं एक बिल्ला हूं तो बिल्ली पर ही तो मरूंगा ना। 
काश उस वक्त कुछ और मांगता तो शायद वह भी मिलता।
वो मेरे पास आई और हमारे बीच बहुत अच्छी-अच्छी मियाऊं-मियाउं यानी बातें हुईं।  मैं उसे चुपचाप अपने घर में नीचे ले गया, उसे पलंग के नीचे छुपा दिया।  सोनिया ने मुझे आवाज दी, "आ जाओ किट्टू, चलो दूध पी लो", मैंने सोनिया के जाने के बाद उसे बाहर बुलाया और अपना दूध पिलाया। 
सोनिया के बॉय फ्रेंड को बिल्लियां पसंद नहीं हैं पर वो सोनिया की वजह से मुझे कुछ नहीं कहता लेकिन एक और बिल्ली घर में देखते ही वह पागल हो गया। उसने मीनू पर गेंद से हमला किया। मेरी बेज्जती तो मैं सह लेता लेकिन मेरी प्रेमिका मीनू की बेज्जती मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई। मैं तीन दिन तक घर नहीं गया।

मीनू की तरह ही उसके साथ सड़क पर रहा। कचरे के डिब्बे से खाना निकाल कर खाया, मीनू ने मुझे खाना ढूंढ़ना सिखाया। मैं जिंदगी में कभी खाली ज़मीन पर नहीं सोया, ठंडा नहीं गुनगुना दूध पिया है मैंने हमेशा ,
मैंने मीनू के लिए सब कुछ छोड़ दिया था लेकिन मीनू मुझे ही धोखा दे रही थी। तीसरे दिन मैंने उसे किसी दूसरे बिल्ले के साथ देखा...कैसे देखा मैं बता नहीं सकता... मुझे यकीन नहीं हुआ अपनी आंखों पर...और कल जब मैं घर आया तो मैंने देखा कि राजू घर में एक कुत्ता ले आया है। सोनिया मुझे भूल गई और अब उस कुत्ते के साथ खेल रही थी। अब उस घर में मेरे लिए कोई जगह नहीं है, मैं पालतू से आवारा बन गया हूं। अब मैं सड़कों पर जीना सीख रहा हूं, ख़तरनाक कुत्तों से बचना, लोगों के दरवाजों पर जाकर उन्हें अट्रैक्ट करना सीख रहा हूं। कुछ अच्छे लोग कभी-कभी मुझे दूध भी पिला देते हैं। काश अगर मैं बोल पाता तो उनसे कहता कि प्लीज़ मुझे पाल लो घर में,
घर में रख लो, मैं बड़ा प्यारा बिल्ला हूं, घर में रहना चाहता हूं। आपका मन लगा कर रखूंगा । प्लीज़... मुझे घर दे दो... कोई तो इस सिर पर छत दे दो...प्लीज...

शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2019

अब तुम से क्या शिकायत करूं

सोचा कुछ शिकायतें करूँ तुम से
कुछ दूर शिकायत के सफर पर
ऐहसास हुआ

कुछ बने- कुछ टूटे ख्वाब न हों
कुछ किससे जीत और हार न हों
किसी का प्यार और प्यार की मार न हो
कुछ खास और कुछ बकवास यार न हों
कभी खुशी कभी ग़म की बौछार न हो
कभी उदासी और कभी मुस्कान न हो
तो ज़िन्दगी क्या हो...? और कैसी हो...?

ऐ ज़िन्दगी, तुम जो हो, जैसी हो
बड़ी खूबसूरत, बड़ी हसीन हो,

चमन चतुर

  चमन चतुर Synopsis चमन और चतुर दोनों बहुत गहरे दोस्त हैं, और दोनों ही एक्टर बनना चाहते हैं. चमन और चतुर जहां भी जाते हैं, वहां कुछ न कु...